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सास और बहु का ऐसा रिश्ता आपने कभी नहीं देखा होगा

बहुत खड़ूस सास थी वो ….सुबह उठते ही सबसे पहले बहु सोनल को ये कहती ….बहु ,तू कहाँ मर गयी …और जवाब में सोनल कहती ……मैं जिन्दा हूँ माँ ….
अगर जिन्दा है तो अभी तक मेरी चाय क्यों नहीं बनायीं इतने साल हो गए …लेकिन तुझे अभी तक पता नहीं कि मैं पूजा करते ही चाय पीती हूँ .
ला रही हूं माँ जी…..
सोनल चाय के साथ, भजिया भी ले आयी
तो सास ने कहा तेल का खिलाकर क्या मारोगी मुझे ?
सोनल ने कहा- ठीक हैं माँ जी वापस ले जाती हूं।
सास ने कहा- रहने दे अब बना दिया हैं तो खा लेती हूं।
सास ने भजिया उठाई और कहा- कितनी गंदी भजिया बनाई हैं तुमने।

सोनल ने कहा माँ जी मुझे कपड़े धोने हैं मैं जाती हूं……और वो दरवाजे के पास छिपकर खड़ी हो गयी।सास भजिया पर टूट पड़ी और पूरी भजिया खत्म कर दी।सोनल मुस्कुराई और काम पर लग गई।
*
लंच का टाइम हुआ। सास ने फिर आवाज लगाई- कुछ खाने को मिलेगा।
सोनल ने जवाब नहीं दिया
सास फिर चिल्लाई- भूखे मारोगी क्या, सोनल आयी और खिचड़ी रख दी।
सास ने गुस्से में कहा ये क्या है, मुझे नहीं खाना इसे। ले जाओ।
सोनल ने कहा- आपको डॉक्टर ने दिन में खिचड़ी खाने को कहा है, खाना तो पड़ेगा ही।
सास मुंह बनाते हुए, हाँ तू मेरी माँ बन जा, बहू फिर मुस्कुराई और चली गई।
*
आज सोनल के घर पूजा थी, वो सुबह 4 बजे उठ गयी। पहले स्नान किया, फिर फूल लाई। माला बनाई। रसोई साफ की। पकवान और भोज बनाया। सुबह के 8 बज गए।अब सास भी उठ चुकी थी। सोनल अब पंडित जी के साथ भगवान के वस्त्र तैयार कर रही थी।
पूजा शुरू हुई,सास चिल्लाती सोनल ये नहीं है, वो नही है।सोनल दौड़ी-दौड़ी आती और सब करती।
अब दोपहर के 1 बज गये थे, आरती की तैयारी चल रही थी, पंडित जी ने सबको आरती के लिए बुलाया और सबके हाथों में थाली दी, जैसे ही बहू ने थाली पकड़ी, थाली हाथों से गिर पड़ी। शायद भोज बनाते हुए सोनल के हाथों मे तेल लगा था, जिसे वो पोंछना भूल गयी थी।
सारे लोग तरह-तरह की बातें करने लगे। कैसी बहू है, कुछ नहीं आता। एक काम भी ठीक से नहीं कर सकती। ना जाने कैसी बहू उठा लाए। एक आरती की थाली भी संभाल नहीं सकी…उसके पति भी गुस्सा हो गए पर सास चुप रही। कुछ नहीं कहा।
रात में जगराता का कार्यक्रम रखा गया था।
सोनल भी एक दो गीत गाने के लिए स्टेज पर चढ़ी।
सास जोर से चिल्लाई- मेरी नाक मत कटा देना, गाना नहीं आता तो मत गा, वापस आ जा।
सोनल मुस्कुराई और गाने लगी।
सबने उसके गाने की तारीफ की, पर सास मुंह फूलाते हुए बोली, इससे अच्छा तो मैं गाती थी जवानी में, तुझे तो कुछ भी नहीं आता।
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अब रात का खाना खिलाया जा रहा था।उसके पति के ऑफिस के दोस्त साइड में ही ड्रिंक करने लगे। उसका पति चिल्लाता थोड़ा आइस लाओ, तो सास चिल्लाती यहाँ दाल नहीं है, फिर चिल्लाता कोल्ड ड्रिंक नहीं है, पापड़ ले आओ।
सोनल इधर-उधर बार -बार आ-जा रही थी कि उसके साड़ी के पल्लू से उसके पति की शराब उसके एक दोस्त पर गिर पड़ी और बोतल टूट गयी
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उसने गुस्से में दो थप्पड़ सोनल को लगाते हुए कहा – जाहिल कहीं की। देखकर नहीं कर सकती। तुझे इतना भी काम नहीं आता।
अब और लोगो को भी बहाना मिल गया वो सास से कहने लगे , देखो क्या कर दिया तुम्हारी बहू ने। कोई काम कीं नही है। एक मेहमान ने कहा …अपने बेटे की दूसरी शादी करा दो, छुटकारा पाओ इस गंवार से।
अचानक सास उठी और अपने बेटे के पास जाकर उसे थप्पड़ मारा और कहा- अरे नालायक, तुमने मेरी बहू को मारा, तेरी हिम्मत कैसे हुई। उसके बेटे के दोस्त कुछ कहने ही वाले थे कि सासु माँ ने घूरते हुए कहा…. यहाँ दारू पीने आये हो, जबकि पता है आज पूजा है कैसे संस्कार दिये हैं तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हे….और हां , किसने मेरी बहू को जाहिल बोला, जरा इधर आओ। अरे पापी, तूने उस लड़की को बस इसलिए मारा कि तेरी शराब की बोतल टूट गयी, पापी वो बच्ची सुबह चार बजे से उठी है। घर का सारा काम कर रही है। ना सुबह से नाश्ता किया ना दिन का खाना खाया। फिर भी हंसते हुए सबकी बातें सुनते हुए, ताने सुनते हुए घर के काम में लगी रही।
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सास को पक्ष लेता देख पति के यार दोस्त चुपके से खिसक लिए। अब सास, सोनल के कमरे मे गयी, और उसका हाथ पकड़कर बाहर लाई। सबके सामने कहने लगी, किसने कहा था अपनी बहू को घर से निकाल के दूसरी बहू ले आना। जरा सामने आओ।कोई सामने नहीं आया।
फिर सास ने कहा, तुम जानते भी क्या हो इस लड़की के बारें में।….. ये मेरी “माँ” भी है, और बेटी भी।
माँ इसलिए क्योकि ये मुझे गलत काम करने पर डाँटती हैं और बेटी इसलिए, क्योकि मेरी दिल की भावनाएं समझ जाती हैं। मेरी दिन-रात सेवा करती है। मेरे हजार ताने सुनती है पर एक शब्द भी गलत नहीं कहती। ना सामने ना पीठ पीछे,और तुम कहते हो, दूसरी बहू ले आऊं।
अरे ….तुम इसे जाहिल बोलते हो।….मगर जाहिल तो तुम सब हो जो कोयले और हीरे में फर्क नही जानते। सोनल सिसकियाँ लेते हुये अपने कमरें में चली गई।
सास ने सबके सामने एक प्लेट उठायी भोजन परोसा और सोनल के कमरे में खुद ले गयी, सास को भोजन लाते देखा तो सोनल ने कहा- अरे माँ जी आप क्या कर रही हों, मैं खुद ले लेती। सास ने प्यार से ताना मारते हुये कहा, डर मत इसमें जहर नही हैं, मार नहीं डालूंगी तुझे। तुझे नई सास चाहिए होगी, पर मुझे अभी भी तू ही मेरे घर की बहू चाहिए …..सोनल ने अपनी सास को रोते हुए गले से लगा लिया।
सास भी रो दी पहली बार…… और कहा- चल सोनल ,साथ खाना खाते है । फिर उसके आंसू पोंछते हुए बोली…… अरे. तु मेरी बहु नही मेरी बेटी है……
*

सच में , कुछ रिश्ते बहुत मीठे होते हैं, बस बातें कड़वी होती है…

—Khusboo Maheshwari की कलम से

 

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