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सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने के लिए DM की पत्नी बन गईं शिक्षक

आज हमारा देश विकास के पथ पर तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक इस विकास में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहा है और अपना योगदान दे रहा है। और यदि बात की जाए प्रशासनिक अधिकारियों की तो उन पर सकरात्मक बदलाव को दारोमदार है क्योंकि वे ही तो है जो जनता से सीधेसम्पर्क में रहते है उनका मार्गदर्शन करते है। वैसे तो देश में प्रशासनिक अधिकारी हजारों हैं। कई आते हैं और चले जाते हैं और उनका नाम तक हमे याद नहीं रहता लेकिन कुछ अधिकारी ऎसे भी होते है जो अपनेकाम से वो पहचान बना लेते है की लोगों के दिलों पर छा जाते हैं और प्रेरणा बन जाते है आने वाली कईपीढ़ियों के लिए।

हमारे लिए गर्व का विषय है की अपने काम से अपनी अलग पहचान बनाने वाले अधिकारियों की हमारे देशमें कमी नही है। इस तरह के कई जिम्मेदार अधिकारियों से आप और हम सभी वाकिफ़ है। इसी श्रृंखला मेंआज हम आपको रूबरू करवाते है उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के जिला कलेक्टर मंगेश घिल्डियाल से |

कौन हैं मंगेश घिल्डियाल :

मंगेश घिल्डियाल
मंगेश घिल्डियाल

मंगेश घिल्डियाल 2011 बैच के IAS अफसर मंगेश ने यू.पी.एस.सी की परीक्षा में पूरे देश में चौथी रैंक हासिल की थी। साथ ही मंगेश ने हमेशा ही अपने कार्यो के जरिए अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। इसका प्रमाण इस बात से मिलता है की जब उनका स्थानांतरण बागेश्वर जिले से हो रहा था तब वहां के निवासियों को उनका येस्थानांतरण इतना नागवार गुजरा के वहां के लोग विरोध में सड़कों पर उतर आए। जगह–जगह भारी विरोधप्रदर्शन हुए थे। लेकिन कहते है अच्छाई और सच्चाई को प्रसारित होते रहना चाहिये ताकि सभी को इसका लाभ मिले इसलिए मंगेश रुद्रप्रयाग में कलेक्टर के पद पर स्थानांतरित होकर आये। आते ही रुद्रप्रयाग के 30 से अधिक स्कूलों का निरीक्षण कर उनकी स्थिति सुधारने के लिए कार्य करने लगे, वहाँ की शैक्षिकस्थितियों से उत्पन्न विसंगतियों और अध्यापकों के आभाव को देखते हुए उनकी पत्नी ऊषा घिल्डियाल भी एक स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में इस मुहिम में जुड़ गई हैं। अब दोनों मिलकर भारत निर्माण की प्रक्रिया मेंअपना अमूल्य योगदान दे रहे है।

कैसे ऊषा घिल्डियाल बनी शिक्षिका :

ऊषा घिल्डियाल
ऊषा घिल्डियाल

कुछ दिनों पहले एक रूटीन चेक के लिए जब मंगेश रुद्रप्रयाग के राजकीय गर्ल्स इंटर कॉलेज गए तो वहांजाने पर उन्हें पता लगा कि स्कूल में विज्ञान विषय का कोई अध्यापक नही है। जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाईमें काफी नुकसान हो रहा है।उन्हें बताया गया कि इंटर कॉलेज में शिक्षकों के नौ पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसेमें 11वीं व 12वीं की कुछ छात्राओं ने अन्यत्र प्रवेश ले लिया है और बाकी बची छात्राओं को पढ़ाई मेंअसुविधा हो रही है। विद्यार्थियों की इस समस्या से व्यथित होकर मंगेश ने अपनी पत्नी उषा के समक्ष इससमस्या का जिक्र किया। मंगेश बताते है ” मैं विद्यार्थियों की इस समस्या पर विचार कर ही रहा था और तभी मैंने अपनी पत्नी से इस विषय में बात की और चूंकि इन दिनों वह घर पर ही हैं तो मैने उसे कहा की वहविद्यार्थियों को विज्ञान की पढ़ाई में आ रही समस्याओं को हल कर सकती है उन्हें पढ़ा सकती है? तो वह भी विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए सहर्ष तैयार हो गईं।“

मंगेश ने इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल से जब इस बारे में बात की तो उन्हें भी कोई आपत्ति नहीं थी और उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया। इस तरह समाधान निकला और अब उनकी पत्नी ऊषा घिल्डियाल इंटरकालेज की छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही है और स्कूल की छात्राओं को उनकी साइंसकी टीचर मिल गई है। मंगेश की पत्नी ऊषा घिल्डियाल ने पंतनगर यूनिवर्सिटी से प्लांट पैथलॉजी में पीएचडी की है। मंगेश बताते है की “शासन स्तर पर शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।तब तक मेरी पत्नी उषा अवैतनिक रूप से वहां अपनी सेवाएं दे देंगी। जिससे विद्यार्थियों को अध्यापनसम्बन्धी कठिनाइयों का सामना ना करना पड़े और शिक्षण प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके।“

उषा घिल्डियाल
उषा घिल्डियाल

डीएम की पत्नी उषा घिल्डियाल अब राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में विज्ञान पढ़ा रही है। निःस्वार्थ भावऔर नि:शुल्क रूप से उषा कक्षा 9वीं और 10वीं की छात्राओं को विज्ञान पढ़ाती है। उषा प्रतिदिन सुबहसाढ़े 8 बजे स्कूल जाती है और साढ़े 11 साढ़े बजे तक स्कूल में रहकर अपने कर्तव्य का जिम्मेदारी केसाथ निर्वाह करती है। तो दूसरी ओर डी.एम. मंगेश घिल्डियाल भी कई बार स्कूलों में निरीक्षण के दौरान बच्चों को पढ़ाने से अपने को नहीं रोक पाते हैं। पहाड़ की पीड़ा को देखते हुए ये दम्पति वहाँ की हर समस्याका समाधान करने के लिए कर्तव्यबध है। वे चाहते है “पहाड़ से पलायन रुके और यहां के छात्र–छात्राओंको अच्छी शिक्षा मिले जिससे वे एक अच्छे नागरिक बनकर अपनी जिम्मेदारियां पूरी करे।“

साथ ही यदि किसी को देखना है कि जिले का हाकिम समाज के प्रति कितना संवेदनशील हो सकता हैरुद्रप्रयाग इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। डीएम मंगेश और उनकी पत्नी उषा द्वारा चलाई जा रही पहल कीरुद्रप्रयाग सहित अन्य स्थानों पर भी खूब सराहना की जा रही है।

आज रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश और उनकी पत्नी उषा के लिए हम यही कहेंगे कि – “रौशनी का एक दियाआँगन में मेरे जल गया, हम देखते ही रह गये वो तिमीर सारा हर गया “

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