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एसिड ने झुलसा दिया था चेहरा आज है प्रेरणा की श्रोत

1990 में लक्ष्मी अग्रवाल  का जन्म दिल्ली के एक मध्यम परिवार में हुआ। वो बेहद शांत, खूबसूरत और खुशनुमा स्वाभाव की लड़की थी। मगर उसने कभी सपने में भी नही सोचा होगा कि 15 साल की उम्र में उस से दुगनी उम्र का कोई सरफिरा आदमी दिल्ली की खान मार्किट में अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसे गुनाह को अंजाम देगा जो उसकी पूरी जिन्दगी को हमेशा के लिए बदल देगा।

laxmi agarwal  before and after
laxmi agarwal before and after

कब हुआ एसिड अटैक  :

ये बात 2005 की है है उस समय वो अपने स्कूल से लौट रही थी कि एक 32 साल के आवारा सरफिरे ने शादी के प्रस्ताव को नकारे जाने के कारण अपने दोस्तों के साथ मिलकर दिन दिहाड़े और भरे बाजार उस पर acid attack कर दिया

इस acid attack मेंलक्ष्मी अग्रवाल के face के साथ-साथ शारीर का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह झुलस गया था। उसके परिवार ने पूरे जीवन भर की कमाई का पाई-पाई बेटी के इलाज पर खर्च कर दिया। इस भयानक घटना के बादलक्ष्मी अग्रवाल तो जिन्दा बच गयी मगर उनकी सूरत और शरीर पर गहरे घाव छोड़ दिए।

पास करवाया नया कानून :

लक्ष्मी अग्रवाल ने डट कर जमाने के सामना किया। न सिर्फ उस ने ज़माने के नजरिये को defend किया बल्कि 2006 में लक्ष्मी ने इन तीनो आरोपियों के खिलाफ Delhi High Court में एक PIL दाखिल की और तीनो आरोपियों को जेल की हवा भी खिलाई।

लक्ष्मी अग्रवाल ने अपनी PIL में न सिर्फ आरोपियों को सजा बढ़ाने, मुआवजा दिलवाने की बात की बल्कि सरकार को मजबूर किया कि वो मौजूदा कानून में संशोधन करे और साथ ही साथ acid की open बिक्री पर भी बंदिश लगाये। ये लड़ाई कर सालों तक चली। जिंदगी की इसी लड़ाई के दौरान 2012 में उसके पिता की भी मृत्यु हो गयी। वो घर मे इकलौते कमाने वाले थे।

अब क्या कर रही है लक्ष्मी :

लक्ष्मी ने हार नहीं मान कर अपनी ज़िन्दगी को नया मोड़ देने की ठान ली। अपने जैसे तेज़ाब हमले से गुजरने वाली लड़कियों के लिए उन्होंने लड़ाई जारी की। ‘स्टॉप एसिड अटैक’ अभियान का हिस्सा बनकर उन्होंने अपनी जैसी कई सारी लड़कियों को हौसला देना शुरू किया।

अपने अभियान के तहत उन्होंने शीरोज नाम के कैफे की शुरूआत की। शीरोज फिलहाल तीन राज्यों में चल रहा है और इनमें काम करने वाली महिलाएं तेज़ाब हमले की उत्तरजीवियां हैं।

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कौन है आलोक दीक्षित और उसने कैसे बदली प्यार की परिभाषा :

अलोक दीक्षित

जब लक्ष्मी अपनी जिंदगी के सब से बुरे दिनों को संभालने में झूझ रही थी तो उसकी मुलाकात आलोक दीक्षित नाम के आदमी से हुई जो कि journalist तथा social activist भी थे। इस पुरे सफ़र में उन्होंने laxmi का भरपूर साथ दिया। आलोक ने बहुत गहराई से जाना कि अगर एक लड़की के पास बाहरी खूबसूरती न रह जाये तो उसे कितना ही कठिन जीवन जीना पड़ता है। मगर आलोक ने सारी traditional विचारों को दरकिनार किया और अपना जीवन लक्ष्मी के साथ बिताने का निर्णय लिया। उनके विश्वास और प्यार की सीमा सिर्फ यही नहीं हैं। 2014 में उन्होंने एक दूसरे के साथ बिना विवाह के साथ रहने का निर्णय भी लिया। वो कहते हैं कि वो नही चाहते कि लोग उनकी शादी में आएं और उनकी भद्दी शक्ल में बारे में comment करें। वो कहते हैं कि वो मरते दम तक एक दूसरे का साथ निभाएंगे और जमाने को बता देंगे कि शादी मन से होती है रिवाज से नहीं।

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